October 25, 2025

First published October 5, 2025

 in Dainik Bhaskar

क्या बौद्ध धर्म गौतम बुद्ध के समय के पहले से नेपाल में उपस्थित था?

Buddha

पिछले महीने, नेपाल के युवकों के विद्रोह की ख़बर भारत और विश्वभर में फैली। लेकिन भारतवासियों के दैनिक जीवन में साधारणतः नेपाल के बारे में चर्चा कम ही होती है, सिवाय माउंट एवेरेस्ट या फिर गोरखा समुदाय की वीरता के संदर्भ में। आइए अगले दो लेखों में नेपाल के इतिहास के बारे में जानते हैं।

18वीं सदी में, जब नेपाल के कई छोटे जागीरों और राज्यों को जोड़कर एक विशाल राज्य बनाया जा रहा था, तब नेपाल के राजा ने अपने राज्य को ‘असल हिंदुस्तान’ घोषित किया। उनका मानना था कि भारत पर मुग़लों के ‘उल्टे धर्म’ का नियंत्रण था। तब से नेपाल को विश्व का एकमात्र हिंदू राज्य माना गया है। 2008 में नेपाल में राजतंत्र के अंत के बाद वह एक धर्मनिरपेक्ष गणतंत्र बन गया। इसके बावजूद, पताके के आकार के उसके लाल रंग के ध्वज पर सूर्य और चंद्र के चिन्ह हैं, जिन वंशों के हिंदू राजाओं ने इस भूमि के कई छोटे जागीरों पर कभी राज किया था।

प्राचीन काल में, इस क्षेत्र की जनजातियां किराट कहलाती थीं। समय के साथ, पूर्व में काठमांडू की घाटी में किसानों की और पश्चिम में पहाड़ी क्षेत्रों में पशुपालकों की जनसंख्या बढ़ गई। नेपाल के प्रारंभिक राजा ग्वाला रहें थे, जिस कारण राजाओं की वंशावली में गोपाल-राजा का उल्लेख पाया जाता है। समय के साथ, काठमांडू घाटी में नेवार समुदाय और पहाड़ों में गोरखा समुदाय शासन करने लगें। संपूर्ण क्षेत्र में उत्तर के पहाड़ों की तिब्बती-बर्मी और दक्षिण के गंगा के मैदानों की भारतीय-आर्य इन दो परंपराओं का प्रभाव था।

नेपाल के प्रारंभिक इतिहास में, वहाँ बौद्ध धर्म प्रमुख था। लेकिन समय के साथ वह स्पष्ट रूप से हिंदू धर्म की ओर मुड़ा। दोनों धर्मों पर तांत्रिक विचारधारा का प्रभाव है। इसलिए, लोग नियमित रूप से ग्राम देवियों को रक्त बलि देकर उन्हें संतुष्ट करते आए हैं। बौद्ध धर्म में वज्रयोगिनी और हिंदू धर्म में स्वस्थानी माता कुछ महत्त्वपूर्ण देवियाँ हैं। नेपाल में जीवित देवियों की परंपरा सबसे लोकप्रिय है। नेवारी समुदाय की ये युवतियां स्थानीय राजाओं को आशीर्वाद देकर उनके राजत्व को वैध करती हैं। 2008 में नेपाल के गणतंत्र बनने के बावजूद वहाँ कुमारी परंपरा क़ायम है।

नेपाल यह नाम नेमि से आया है। बौद्ध और हिंदू आख्यानों के अनुसार नेमि उत्तर बिहार के मिथिला क्षेत्र के राजा थे, जो क्षेत्र राजा जनक और गौतम बुद्ध से भी जुड़ा हुआ है। यह मान्यता है कि बौद्ध धर्म नेपाल में स्वयं गौतम बुद्ध के समय से बहुत पहले आया था।

बौद्ध धर्म के स्वयंभु पुराण के अनुसार, आदि बुद्ध नेपाल में अग्नि के स्तंभ से प्रकट हुए थे, कुछ उस तरह जिस तरह हिंदू धर्म के अनुसार बारह ज्योतिर्लिंगों के स्थान पर शिव अग्नि के स्तंभ से प्रकट हुए थे। आदि बुद्ध के बाद सात बुद्ध आए, जिनमेंसे शाक्यमुनि बुद्ध अंतिम और ऐतिहासिक बुद्ध थे। उनका जन्म 2500 वर्ष पहले, नेपाल के लुम्बिनी में वज्जि और मल्ल महाजनपदों अर्थात राज्यों के समय हुआ था।

आख्यानों के अनुसार, गौतम बुद्ध अपने शिष्यों को नेपाल में उस जगह लेकर गए थे जहाँ किसी पूर्व जन्म में उन्होंने मणि छोड़कर अपना शरीर एक बाघ को प्रस्तुत किया था ताकि वह बाघ भूखा न रहे। बौद्ध मठों के वृत्तांतों के अनुसार बुद्ध के शिष्य, आनंद, को नेपाल की यात्रा के समय शीतदंश हुआ था। तबसे बौद्ध साधुओं को ठंडी जगहों में पादुका पहनने की अनुमति दी गई। लुम्बिनी में 2300 वर्ष पुराना अशोक स्तंभ है, जो सम्राट अशोक ने नेपाल की यात्रा के समय खड़ा किया था। एक आख्यान के अनुसार उनकी पुत्री ने नेपाल के राजकुमार से ववाह किया। एक अन्य आख्यान के अनुसार, बोधिसत्त्व मंजुश्री ने अपनी ज्वालामय तलवार से एक झील को सूखा किया, जिससे निर्मित घाटी में काठमांडू शहर बसा।

5वीं सदी CE तक, लिच्छवि राजाओं के उगम के साथ महायान बौद्ध धर्म नेपाल का प्रमुख धर्म बन गया और अवलोकितेश्वर तथा अन्य बोधिसत्त्वों की उपासना व्यापक बन गई। बौद्ध मठवासी भिक्खु संघ और भिक्खुनी संघ इन समुदायों का भाग थे। मंदिरों में पाए गए शिलालेखों के आधार पर हम कह सकते हैं कि कि बौद्ध पुण्यस्थलों के निर्माण के लिए दान दी गई भूमि का यज्ञों के लिए भी उपयोग किया जाना अपेक्षित था। यह इस बात का संकेतक है कि बौद्ध और हिंदू धर्मीय बहुत पहले से आपस में मिलते आए थे।

अगले लेख में हम इस चर्चा को जारी रखते हुए जानेंगे कि नेपाल में बौद्ध धर्म का प्रभाव घटकर हिंदू धर्म अधिक प्रचलित कैसे हुआ।


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