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  • जैन धर्म की संरक्षक यक्षियाँ

    जैन धर्म की संरक्षक यक्षियाँ

    जैन धर्म मठवासी धर्म है। इतिहासकारों के अनुसार उसका उगम 2,500 वर्ष पहले हुआ और उसके अधिकाँश धर्मग्रंथ 1,500 वर्ष पहले रचें गए। लेकिन उसके आख्यानशास्त्र के अनुसार वह एक सनातन धर्म है अर्थात वह अनादि और अनंत है। …

  • गाथा के माध्यम से राजा की स्थापना

    गाथा के माध्यम से राजा की स्थापना

    राजा बनने के लिए, किसी पुरुष को यह सिद्ध करना आवश्यक है कि वह राज परिवार का सदस्य है। लेकिन संस्थापक बनने के लिए क्या करना अपेक्षित है? कोई व्यक्ति दूसरे लोगों पर राज करने के लिए अपने आप को उनसे विशिष्ट कैसे निर्धारित करता है?…

  • जानें शून्य की धारणा अरब पहुंचने का मॉनसूनी हवाओं से संबंध

    जानें शून्य की धारणा अरब पहुंचने का मॉनसूनी हवाओं से संबंध

    भारत और अरब के बीच व्यापार का लंबा इतिहास है। लगभग 4000 वर्ष पहले, हड़प्पा की सभ्यता और अरब के बीच समुद्री व्यापार होता था। नाविक पंछियों की मदद से समुद्रतट की दिशा और उससे दूरी निर्धारित कर जहाज़ों को समुद्रतट के निकट रखते हुए यात्रा करते थे। यह हमें हड़प्पा के मुहरों से पता…

  • देश के विकास में क्या शंका श्रद्धा से अधिक महत्त्वपूर्ण है?

    देश के विकास में क्या शंका श्रद्धा से अधिक महत्त्वपूर्ण है?

    क्या श्रद्धा ही भारत के पतन का कारण है? आइए, आज के लेख में इस विचार पर ग़ौर करते हैं।…

  • सुवर्णभूमि पहुँचकर जानें कैसे बदला हिंदू धर्म

    सुवर्णभूमि पहुँचकर जानें कैसे बदला हिंदू धर्म

    पिछले सप्ताह हमने जाना कैसे बैंगकॉक में ब्रह्मा देवता को पूजा जाता है। आज इस चर्चा को जारी रखते हुए हम जानेंगे कैसे हिंदू धर्म थाईलैंड पहुंचा और उसने क्या रूप लिया।…

  • बैंगकॉक के पूजनीय ब्रह्मा देवता

    बैंगकॉक के पूजनीय ब्रह्मा देवता

    हिंदू धर्म में साधारणतः ब्रह्मा को नहीं पूजा जाता है, बावजूद इसके कि वे इस सृष्टि के सृजनकर्ता हैं। इसके कई कारण हैं। एक कहानी के अनुसार एक बार ब्रह्मा और विष्णु के बीच इस बात पर विवाद हुआ कि दोनों में कौन श्रेष्ठ है। तब अचानक से पृथ्वी और आकाश दोनों में छेद करता…

  • कार्तिकेय, मुरुगन, सरवण, आग्नेय और षण्मुख, जानें युद्ध के देवता के इन नामों की उत्पत्ति

    कार्तिकेय, मुरुगन, सरवण, आग्नेय और षण्मुख, जानें युद्ध के देवता के इन नामों की उत्पत्ति

    प्राणी भोजन, क्षेत्र और जोड़ीदार पाने के लिए आपस में लड़ते हैं। मनुष्य भी इन्हीं के लिए लड़ते हैं। ऐसा करने पर हम भीतर के प्राणी को व्यक्त करते हैं, जो दूसरों पर हावी होना चाहता है। लेकिन कभी-कभार युद्ध करना नेक भी माना जाता है, जब हमारा उद्देश्य स्वतंत्र रहना या अपने सम्मान को…

  • बौद्ध धर्म का पूँजीवाद और कला में योगदान

    बौद्ध धर्म का पूँजीवाद और कला में योगदान

    हमें हमेशा से सिखाया गया है कि पूँजीवाद का आविष्कार युरोप में हुआ था। वास्तव में पूँजीवाद का वर्तमान रूप युरोप में हुई औद्योगिक क्रांति का परिणाम है। इस औद्योगिक क्रांति के पहले, पूँजीवाद उन व्यापारिक मार्गों में पनपा जिनपर अरब व्यापारियों का नियंत्रण था। ये मार्ग दक्षिण-पूर्वी एशिया से लेकर भूमध्यसागर तक फैलें थे।…

  • जानें कैसे सर्वश्रेष्ठ परभक्षी सिंह बना राजत्व का प्रतीक

    जानें कैसे सर्वश्रेष्ठ परभक्षी सिंह बना राजत्व का प्रतीक

    पूर्व एशिया के राजा, चाहे वे चीन, जापान, वियतनाम, थाईलैंड या इंडोनेशिया के हों, सिंह को राजत्व का प्रतीक मानते थे। चीन में राजमहलों के सामने, सिंह और सिंहिनी की मूर्तियाँ पाईं जाती हैं। सिंह के पंजे के नीचे एक ग्लोब होता है, जो विश्व का प्रतीक होता है। दूसरी ओर, सिंहिनी के पंजों के…

  • बौद्ध जातक कथाओं, बाइबल इत्यादि से जानें इतिहास में व्यापारियों का योगदान क्या रहा

    बौद्ध जातक कथाओं, बाइबल इत्यादि से जानें इतिहास में व्यापारियों का योगदान क्या रहा

    अधिकांश ऐतिहासिक कहानियों में राजा और उनके द्वारा लड़ें गए युद्धों का वर्णन होता है। यह इसलिए कि इतिहास का विषय औपचारिक ढंग से 19वीं सदी में विकसित हुआ, जिस समय के राजा अपने पूर्वजों के पराक्रमों के बारे में जानने के इच्छुक थे। इसलिए, इतिहासकारों ने भी साम्राज्यों के निर्माण पर ध्यान केंद्रित किया।…

  • जानें तमिल नाडु के चोल राजवंश की महिमा, बृहदेश्वर मंदिर और नटराज मूर्ति के माध्यम से

    जानें तमिल नाडु के चोल राजवंश की महिमा, बृहदेश्वर मंदिर और नटराज मूर्ति के माध्यम से

    कुछ साल पहले मणि रत्नम ने चोल राजवंश पर पोन्नियिन सेलवन नामक दो फ़िल्में बनाईं। मैंने पाया कि फ़िल्मों के भव्य पोस्टर, बढ़िया ट्रेलर और समीक्षकों की अत्यधिक प्रशंसा के बावजूद अधिकाँश ग़ैर-तमिल प्रेक्षक इन फ़िल्मों से ऊब गए थे। लेकिन इतने वरिष्ठ निर्माता की फ़िल्मों के बारे में वे यह बात  खुलकर कह न…

  • हिंदू धर्म में पूर्व भारत का योगदान – लेख दूसरा

    हिंदू धर्म में पूर्व भारत का योगदान – लेख दूसरा

    पिछले लेख में हमने भारतीय उपमहाद्वीप के पूर्वी भाग में हुए ऑस्ट्रो-एशियाटिक प्रवसन और उससे हुए मुंडा भाषा के उगम की बात की। हमने देखा कैसे मुंडा भाषा के कुछ शब्द ऋग्वेद में पाए जाते हैं और कैसे पूर्वी भारत में वैदिक और अ-वैदिक विचारों का मिलन हुआ। अंत में हमने देखा कैसे इस क्षेत्र…

  • हिंदू धर्म में पूर्व भारत का योगदान – लेख पहला

    हिंदू धर्म में पूर्व भारत का योगदान – लेख पहला

    जब-जब हम भारत के हिंदू धर्म की बात करते हैं, तब-तब अधिकांश ध्यान उत्तर भारत और उसके पश्चिम में स्थित राजपूत क्षेत्रों तथा पूर्व में स्थित गंगा नदी के मैदानों को दिया जाता है। इसके बाद ध्यान दक्षिण भारत और आर्य-द्रविडियाई विभाजन की ओर मुड़ता है। पूर्व भारत — गंगा की नदीमुख-भूमि, ब्रह्मपुत्र नदी घाटी…

  • जैन धर्म की संरक्षक यक्षियाँ

    जैन धर्म की संरक्षक यक्षियाँ

    जैन धर्म मठवासी धर्म है। इतिहासकारों के अनुसार उसका उगम 2,500 वर्ष पहले हुआ और उसके अधिकाँश धर्मग्रंथ 1,500 वर्ष पहले रचें गए। लेकिन उसके आख्यानशास्त्र के अनुसार वह एक सनातन धर्म है अर्थात वह अनादि और अनंत है। उसके अनुसार समय के अनगिनत कालचक्र होते हैं और प्रत्येक कालचक्र में 24 तीर्थंकर, 12 चक्रवर्ती…

  • गाथा के माध्यम से राजा की स्थापना

    गाथा के माध्यम से राजा की स्थापना

    राजा बनने के लिए, किसी पुरुष को यह सिद्ध करना आवश्यक है कि वह राज परिवार का सदस्य है। लेकिन संस्थापक बनने के लिए क्या करना अपेक्षित है? कोई व्यक्ति दूसरे लोगों पर राज करने के लिए अपने आप को उनसे विशिष्ट कैसे निर्धारित करता है?…

  • बोधिसत्त्व की करुणा समझें जातक कथाओं से

    बोधिसत्त्व की करुणा समझें जातक कथाओं से

    सभी उस राजकुमार की कहानी जानते हैं जिसके पिता ने उसे जीवन की सभी समस्याओं से बचाए रखा। राजकुमार का समृद्ध राज्य और सुखी परिवार था। लेकिन एक दिन उसने अपने राज्य में घूमते समय वृद्ध, बीमार और मरणासन्न लोगों को देखा। राजकुमार को यह जानकर निराशा हुई कि सभी को बुढ़ापे और बीमारी से…