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  • ये दो समुदाय हिंदू धर्म को कंबोडिया और वियतनाम तक ले गए

    ये दो समुदाय हिंदू धर्म को कंबोडिया और वियतनाम तक ले गए

    पांचवीं सदी CE में, अर्थात 1500 वर्ष पहले, भारत में गुप्त राजवंश उभरा। गुप्त राज परिवार पहले राज परिवारों में से था जिसने हिंदू धर्म के ढांचे पर आधारित अपने आप को स्स्थापित किया था। गुप्त काल के बाद, रोम के साथ व्यापार अस्त-व्यस्त हुआ, क्योंकि रोमीय साम्राज्य का अंत हुआ था। लेकिन भारत के…

  • हरिहर छवियों से पता चलता है हिंदू धर्म का मूल स्वभाव

    हरिहर छवियों से पता चलता है हिंदू धर्म का मूल स्वभाव

    पिछले सप्ताह हमने जाना कैसे दो विशेष समुदाय शिव और विष्णु की अर्चना को वियतनाम और कंबोडिया तक ले आए। आइए यह चर्चा जारी रखते हैं।…

  • मन की गांठें खोलने का माध्यम है योग

    मन की गांठें खोलने का माध्यम है योग

    योग यह शब्द वैदिक काल का शब्द है। उसका मूल, सबसे सरल अर्थ दो वस्तुओं को जोड़ना था – उदाहरण के तौर पर अश्व को गाड़ी से जोड़ना या बैल को गाड़ी से जोड़ना। स्पष्ट रूप से कहना हो तो योग का अर्थ दो धारणाओं या दो वस्तुओं में संरेखण करना है।…

  • उत्तर और दक्षिण भारत की दो यात्राओं में क्या संबंध है

    उत्तर और दक्षिण भारत की दो यात्राओं में क्या संबंध है

    मुंबई में, हिंदू पंचांग का महत्त्वपूर्ण श्रावण महीना गटारी अमावस्या के दिन शुरू होता है। लेकिन भारत के कई अन्य भागों में वह इससे पहले आने वाली गुरू पूर्णिमा के दिन शुरू होता है। इस दिन कई युवक (और कुछ युवतियां भी) अपने कंधों पर कांवड़ लटकाए हुए गंगा नदी के तट से अपने-अपने गांवों…

  • पाबूजी की लोककथा से जानें शूर्पणखा और लक्ष्मण के पुनर्जन्म की कहानी

    पाबूजी की लोककथा से जानें शूर्पणखा और लक्ष्मण के पुनर्जन्म की कहानी

    रामायण में शूर्पणखा की कहानी के बारे में अधिकांश लोग जानते हैं। शूर्पणखा राक्षसों के राजा, रावण की बहन थी और जंगल में स्वतंत्र जीवन जीती थी। एक दिन वह राम से मिली, जिनका वनवास चल रहा था। उनकी सुंदरता से मोहित होकर शूर्पणखा ने उनसे विवाह करने की मांग की। लेकिन विवाहित होने के…

  • जानें कैसे लक्ष्मण को कर्म का फल भोगना पड़ा

    जानें कैसे लक्ष्मण को कर्म का फल भोगना पड़ा

    पिछले सप्ताह हमने पाबूजी की लोककथा के माध्यम से जाना कैसे लक्ष्मण, शूर्पणखा और रावण का क्रमशः पाबूजी, राजकुमारी फूलवती और जिंदराव खींची के रूप में पुनर्जन्म हुआ था। आइए आज यह कहानी जारी रखते हैं। ध्यान रहें कि यह एक मौखिक परंपरा है।…

  • हड़प्पा की सभ्यता ने एक क़ीमती पत्थर को क्यों नकारा

    हड़प्पा की सभ्यता ने एक क़ीमती पत्थर को क्यों नकारा

    कल्पना करें कि आप 5000 वर्ष पहले के मिस्र और मेसोपोटामिया (जहाँ वर्तमान का इराक़ देश स्थित है) पहुंचे हों। आपको वहाँ के देवी-देवताओं की मूर्तियां बड़ी उल्लेखनीय लगेंगी। उनमें बाल, भौंहें और आँखें सभी नीले रंग के होंगे। और इस स्पष्ट नीले रंग के पास सोना या तांबा होगा। यह चमकीला नीला रंग मूर्तियों…

  • शंकराचार्य, दयानंद सरस्वती और स्वामी विवेकानंद के भिन्न वेदांत

    शंकराचार्य, दयानंद सरस्वती और स्वामी विवेकानंद के भिन्न वेदांत

    1200 वर्ष पहले आदि शंकराचार्य ने जिस प्रकार हिंदू धर्म को व्यक्त किया वह लगभग 150 वर्ष पहले स्वामी विवेकानंद और दयानंद सरस्वती की अभिव्यक्तियों से बहुत अलग था। यह इसलिए कि तीनों को अलग प्रकार की चुनौतियों का सामना करना पड़ा था, हालाँकि तीनों अभिव्यक्तियों में बहुत समानताएं भी थी।…

  • कैसे स्थल-पुराणों से श्रद्धालुओं को सांसारिक जीवन जीने का साहस मिला

    कैसे स्थल-पुराणों से श्रद्धालुओं को सांसारिक जीवन जीने का साहस मिला

    आज का लेख एक कहानी से शुरू करते हैं। एक बार, विष्णु और लक्ष्मी के बीच हुए झगड़े के बाद लक्ष्मी घर छोड़कर चली गईं और विष्णु उन्हें ढूंढने निकलें। ढूंढते-ढूंढते उन्हें इमली के पेड़ के नीचे दीमक का टीला दिखाई दिया और उन्होंने उसमें वास ले लिया। फिर एक ग्वाले ने आकर उन्हें दूध…

  • बौद्ध जातक कथाओं, बाइबल इत्यादि से जानें इतिहास में व्यापारियों का योगदान क्या रहा

    बौद्ध जातक कथाओं, बाइबल इत्यादि से जानें इतिहास में व्यापारियों का योगदान क्या रहा

    अधिकांश ऐतिहासिक कहानियों में राजा और उनके द्वारा लड़ें गए युद्धों का वर्णन होता है। यह इसलिए कि इतिहास का विषय औपचारिक ढंग से 19वीं सदी में विकसित हुआ, जिस समय के राजा अपने पूर्वजों के पराक्रमों के बारे में जानने के इच्छुक थे। इसलिए, इतिहासकारों ने भी साम्राज्यों के निर्माण पर ध्यान केंद्रित किया।…

  • जानें तमिल नाडु के चोल राजवंश की महिमा, बृहदेश्वर मंदिर और नटराज मूर्ति के माध्यम से

    जानें तमिल नाडु के चोल राजवंश की महिमा, बृहदेश्वर मंदिर और नटराज मूर्ति के माध्यम से

    कुछ साल पहले मणि रत्नम ने चोल राजवंश पर पोन्नियिन सेलवन नामक दो फ़िल्में बनाईं। मैंने पाया कि फ़िल्मों के भव्य पोस्टर, बढ़िया ट्रेलर और समीक्षकों की अत्यधिक प्रशंसा के बावजूद अधिकाँश ग़ैर-तमिल प्रेक्षक इन फ़िल्मों से ऊब गए थे। लेकिन इतने वरिष्ठ निर्माता की फ़िल्मों के बारे में वे यह बात  खुलकर कह न…

  • उत्तर यूरोप के आख्यान शास्त्र से जानें एक विलक्षण अश्व की कहानी

    उत्तर यूरोप के आख्यान शास्त्र से जानें एक विलक्षण अश्व की कहानी

    आज के लेख के माध्यम से भारत से दूर उत्तर यूरोप तक यात्रा करके वहाँ के नॉर्स लोगों के आख्यान शास्त्र के बारे में जानते हैं। ये लोग लगभग एक हज़ार वर्ष पहले वहाँ जीते थे।…

  • गणेशजी का नाग उनके मूषक का शिकार क्यों नहीं करता?

    गणेशजी का नाग उनके मूषक का शिकार क्यों नहीं करता?

    गणेशजी की एक उपाधि लम्बोदर है। उनका उदर समृद्धि और प्रचुरता का प्रतीक है। उनका गज का सर हममें शक्ति की भावना उत्पन्न करता है। उनका वाहन एक मूषक है, जो बाधाओं को पार करके गोदामों तक पहुँचकर अनाज जमा करने के लिए जाना जाता है। मूषकों को पकड़ना कठिन होता है। रोचक बात यह…

  • उत्तर यूरोप के आख्यान शास्त्र से जानें एक विलक्षण अश्व की कहानी

    उत्तर यूरोप के आख्यान शास्त्र से जानें एक विलक्षण अश्व की कहानी

    आज के लेख के माध्यम से भारत से दूर उत्तर यूरोप तक यात्रा करके वहाँ के नॉर्स लोगों के आख्यान शास्त्र के बारे में जानते हैं। ये लोग लगभग एक हज़ार वर्ष पहले वहाँ जीते थे।…

  • गणेशजी का नाग उनके मूषक का शिकार क्यों नहीं करता?

    गणेशजी का नाग उनके मूषक का शिकार क्यों नहीं करता?

    गणेशजी की एक उपाधि लम्बोदर है। उनका उदर समृद्धि और प्रचुरता का प्रतीक है। उनका गज का सर हममें शक्ति की भावना उत्पन्न करता है। उनका वाहन एक मूषक है, जो बाधाओं को पार करके गोदामों तक पहुँचकर अनाज जमा करने के लिए जाना जाता है। मूषकों को पकड़ना कठिन होता है। रोचक बात यह…

  • आइए पाँच हज़ार वर्षों का सफ़र तय करते हैं सात दिनों में

    आइए पाँच हज़ार वर्षों का सफ़र तय करते हैं सात दिनों में

    आज के लेख के लिए कुछ रोचक करते हैं और वह है भारत के इतिहास को केवल एक सप्ताह में संक्षिप्त करना। हड़प्पा की सभ्यता से लेकर आधुनिक काल तक भारत का इतिहास लगभग 5000 वर्ष पुराना है। इसलिए, इस एक सप्ताह का प्रत्येक दिन लगभग 700 वर्षों की अवधि का होगा। आइए देखते हैं…