आज के लेख के माध्यम से भारत से दूर उत्तर यूरोप तक यात्रा करके वहाँ के नॉर्स लोगों के आख्यान शास्त्र के बारे में जानते हैं। ये लोग लगभग एक हज़ार वर्ष पहले वहाँ जीते थे।
उत्तर यूरोप में ईसाई आख्यान शास्त्र से पहले नॉर्स आख्यान शास्त्र प्रचलित था। इस आख्यान शास्त्र में कई रोचक कहानियां हैं, जैसे आठ-टांगों वाले अश्व की कहानी। पिछले कुछ दशकों में थॉर और लोकी जैसे नॉर्स देवताओं पर आधारित हॉलीवुड चलचित्र बड़े लोकप्रिय बनें हैं। फलस्वरूप, नॉर्स आख्यान शास्त्र की लोकप्रियता भी बढ़ गई है। इसका एक और कारण 21वीं सदी के प्रारंभ में बनी ‘लॉर्ड ऑफ़ द रिंग्स’ चलचित्रों की लोकप्रियता है। उनमें नॉर्स आख्यान शास्त्र पर आधारित जादुई शक्तियों वाले मनुष्य-रूपी एल्व और बौने ड्वार्फ़ जैसे तरह-तरह के विलक्षण जीव दर्शाए गए।
हमें इस आख्यान शास्त्र के बारे में अधिकाँश जानकारी ईसाई पादरियों और उत्तरी लोगों की एड्डा नामक गाथाओं से मिली है। नॉर्स लोग वाइकिंग भी कहलाते हैं। वाइकिंग खूंखार योद्धा थे जो मानते थे कि युद्ध में मृत्यु पाने से देवताओं के राजा, ओडिन, की बेटियां, वलकीरी, उनकी प्रशंसक बन जाती। फिर वलकीरी सर्वश्रेष्ठ मृत योद्धाओं को अस्गार्ड नामक देवताओं की सभा में ले जाती। यहाँ, इन योद्धाओं को पुनर्जीवित किया जाता था, और फिर वे देवताओं के संग खान-पान करते थे। इसके बाद देवता और वाइकिंग योद्धा रागनारॉक नामक अंतिम युद्ध में एक साथ लड़ने जाते थे।
नॉर्स लोगों का यह विश्वास था कि इस अंतिम युद्ध में सृष्टि का अंत होगा। और देवता मनुष्य-रूपी विशालकाय जायंट और गॉब्लिन नामक विकृत, नटखट पिशाचों के साथ लड़ाई में मारे जाएंगे। देवताओं के मरने की यह धारणा अन्य संस्कृतियों में नहीं पाई जाती है।
नॉर्स लोगों में विश्व की उत्पत्ति की कहानी भी बड़ी अनोखी है। वे मानते थे कि विश्व की शुरुआत में एक विशाल रिक्त जगह होती थी। इस रिक्त जगह की एक ओर आग थी और दूसरी ओर बर्फ़ था। आग की उष्णता और बर्फ़ की शीतलता के मिलने पर कई शाखाओं वाले एक विशाल पेड़ ने जन्म लिया। इस पेड़ की प्रत्येक शाखा पर जीवों की एक अलग नस्ल ने वास किया: जायंट, देवता, मनुष्य, ड्वार्फ़, एल्व और गॉब्लिन।
लोकी एक लोकप्रिय नॉर्स देवता हैं। हालाँकि कुछ लोग उन्हें शैतान समान समझते हैं, वास्तव में वे दुष्ट नहीं बल्कि केवल उपद्रवी और नटखट हैं। वे यह नहीं समझते कि उनकी शरारतों के गंभीर परिणाम हो सकते हैं। वे चालाक ही नहीं बल्कि सम्मोहक भी हैं, जो जब मन चाहे अपना रूप बदलते हैं। इस प्रकार, वे पुरुष और स्त्री दोनों रुप लेकर जीवों को जन्म देते हैं। लोकी तीन भिन्न जीवों – नॉर्स आख्यान शास्त्र में पाताल की देवी, हेल, एक समुद्री सांप और एक भेड़िए – के पिता हैं। कहते हैं कि इसी भेड़िए के कारण रागनारॉक के युद्ध में ओडिन की मृत्यु होगी और विश्व का अंत होगा। लोकी एक आठ-टांगों वाले अश्व की माँ भी हैं। आइए इससे जुड़ी कहानी जानते हैं।
एक दिन, एक जायंट ने देवताओं को आश्वासन दिया कि वह किला बनाकर उनके राज्य को शत्रुओं से सुरक्षित रखेगा। बदले में देवताओं से अपेक्षित था कि वे उसे फ़्रेया नामक देवी से विवाह करने दें। ओडिन की इच्छा न होते हुए भी वे मान गए। उन्हें लगा कि वे उस जायंट को गर्मी शुरू होने से पहले किला तैयार करने का असंभव लक्ष्य देकर वह विवाह रोक पाएंगे। लेकिन जायंट का शक्तिशाली अश्व बड़ी तेज़ी से किला निर्माण कर सकता था, जिसके बलबूते जायंट ने ओडिन की यह असंभव शर्त मान ली।
किला तेज़ी से बनता हुआ देखकर ओडिन बहुत चिंतित थे। तब उन्हें लोकी से मदद मिली। लोकी ने अपना रूप बदल दिया और एक मादा अश्व बनकर जायंट के अश्व को लुभाने लगें। जायंट के अश्व का ध्यान भंग हुआ और उसने किला बनाना रोक दिया। इस प्रकार, किला अपूर्ण रह गया और फ़्रेया जायंट से विवाह करने से बच गईं। अपूर्ण ही सही, लेकिन किले ने देवताओं को सुरक्षित रखा। और जायंट के अश्व तथा मादा अश्व ने आठ-टांगों वाले अश्व को जन्म दिया, जो फिर ओडिन का वाहन बन गया।











